नई दिल्ली, 18 जुलाई
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक पिछले 20 दिनों से NEET, CBSE, CUET और SSC जैसी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश, मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने बताया कि वांगचुक फिलहाल मेडिकल निगरानी में हैं।
सोनम वांगचुक के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की नेहा, आमीन और मनीष भी पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। वे अभी भी अनशन पर ही हैं।नेहा को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है, जबकि आमीन और मनीष की तबीयत भी लगातार बिगड़ रही है।
वहीं, आंदोलन से जुड़े कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने कहा कि वांगचुक को अस्पताल ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। अभिजीत दीपके ने कहा कि मैं आज से अपना अनशन शुरू कर रहा हूं। 20 जुलाई को हमारा संसद मार्च भी होगा और मेरा अनशन भी जारी रहेगा। इन्हें लगता है कि सोनम सर को यहां से उठाकर अंदर ले जाने से यह आंदोलन खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं होगा। यह आंदोलन जारी रहेगा।

वांगचुक को अस्पताल ले जाए जाने के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हटाया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की, जबकि पुलिस ने जंतर-मंतर जाने वाले सभी रास्तों पर सुरक्षा बढ़ा दी और लोगों से शांतिपूर्ण ढंग से स्थल खाली करने की अपील की।
इस बीच, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कहा कि उनकी अनुमति और डॉक्टर की सहमति के बिना वांगचुक को कोई दवा या उपचार नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी अनुमति के बिना कोई इलाज शुरू किया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी।
शुक्रवार रात सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया था कि लंबे अनशन के कारण उनका करीब 20 प्रतिशत वजन कम हो चुका है और शरीर की मांसपेशियां भी प्रभावित होने लगी हैं। लेकिन उन्होंने फिर भी देशवासियों से 20 जुलाई के मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी।
बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी का धरना 6 जून 2026 को शुरू हुआ था, जिसे बाद में 20 जून से अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदल दिया गया। 28 जून से सोनम वांगचुक स्वयं आमरण अनशन पर बैठे हुए थे।

