कुरुक्षेत्र , 14 जुलाई
कुरुक्षेत्र के लोकनायक जयप्रकाश (LNJP) सिविल अस्पताल में भर्ती अढ़ोन गांव के शिव मंदिर के पुजारी योगीराज गिरी (74) ने हमला होने वाली सुबह का घटनाक्रम बताया।उन्होने बताया कि रात करीब 3 बजे मैं उठा। धर्मशाला मंदिर से अलग बनी हुई है। शौच के लिए गया था। उसी दौरान एक कार की आवाज सुनाई दी। कार पहले दूसरी गांव तरफ गई और फिर वापस आ गई। उस समय मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। रोज की तरह उन्होंने 4 बजे तक मंदिर की पूरी सफाई कर ली थी। इसके बाद स्नान की तैयारी कर रहे थे। उस समय मैंने सिर्फ गुरु माला पहन रखी थी और पूरी तरह तैयार भी नहीं हुए थे। वह अपने गणों (मानसिक रूप ) से बातचीत कर रहे थे। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि “पठानकोट से कुरुक्षेत्र और चारों तरफ से इसे घेर लो, आज बरसाती बादल बाहर नहीं जाना चाहिए। दावा किया कि आरोपी (पंकज) ने इस बातचीत का गलत मतलब निकाला कि उनको मारने की तैयारी कर रहे हैं।
योगीराज गिरी के मुताबिक, मंदिर के पास दादा खेड़ा और पीपल का पेड़ है। वहीं पानी की सप्लाई है। वह वहीं अपना टब धोकर पानी भर रहे थे। तभी आरोपी ने अपनी पत्नी से (लठ) लाठी मंगवाई और उसके पास लेकर पहुंच गया। उसके साथ उसकी पत्नी भी थी। कुछ ही देर में एक और व्यक्ति भी वहां आ गया और तीनों ने मिलकर उन्हें पकड़ लिया।
कैमरे कर दिए थे बंद
पुजारी का कहना है कि इसके बाद उनकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी गई। आरोपियों ने मंदिर के कैमरे पहले ही बंद कर दिए थे। उन्हें पीटा गया, तो कैमरे में कुछ रिकॉर्ड नहीं हुआ। मुझे काफी देर तक पीटा गया। वहां ईंटें भी पड़ी थीं। मुझे ईंट मार देते तो शायद मैं बचता ही नहीं।”परना गले में बांधा, फिर घसीटते हुए बाहर ले गए। पुजारी ने बताया कि मारपीट के दौरान एक परना पूरी तरह खून से भर गया। इसके बाद आरोपी ने उनके गले में परना डाला और उसी से उन्हें घसीटते हुए बाहर ले जाया गया। जैसे ही उन्हें मंदिर से बाहर सड़क की तरफ लाया गया, पंचायत के सीसीटीवी कैमरे में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई।
नाले या नहर में फेंकने की कर रहे थे बात
दावा है कि आरोपी उन्हें धर्मशाला के पहले गेट के पास बने नाले तक ले गए। वहां आरोपी उसे इसी नाले में डालने की बात कर रहे थे। दूसरा आरोपी नहर में फेंकने में बात बोल रहा था। इसी दौरान गांव के कुछ लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। लोगों को आता देख आरोपी ने भी उसे कई लातें मारीं।
पाकिस्तान में कर रहा था बात
उन्होंने बताया कि इससे पहले गांव का ही एक व्यक्ति सुबह पूजा करने मंदिर आया था। उसने मारपीट होते देख आरोपियों से पूछा, तो आरोपियों ने उससे कहा कि यह पाकिस्तान से बात कर रहा था। वह व्यक्ति आरोपियों से डर गया और वहां से चला गया, क्योंकि वह आरोपियों के स्वभाव को जानता था।
ग्रामीण बोले- गलती बाबा की नहीं
पुजारी ने बताया कि नाले के पास भी उनके साथ मारपीट जारी रही। इसमें उनका पैर मुड़ गया। मौके पर पहुंचे गांव के लोगों ने आरोपियों को रोकते हुए साफ कहा कि गलती बाबा की नहीं, तेरी है। इसके बाद आरोपी वापस चले गए। जब सुबह हुई तो गांव वालों ने उन्हें इलाज के लिए भेज दिया। ‘मैं संत हूं, मेरा कोई परिवार नहीं बचा’
बातचीत के दौरान जब उनसे परिवार के बारे में पूछा गया तो योगीराज गिरी बोले कि मैं संत हूं। मेरा कोई परिवार नहीं है। मैं बचपन से ही सन्यासी हूं। सात साल की उम्र में माता-पिता ने मुझे डेरे में दीक्षा दिला दी थी। उनका संबंध जूना अखाड़ा से है। वह मूल रूप से उत्तराखंड के बूढ़ा केदार गांव के रहने वाले हैं। साल 2013 में केदारनाथ क्षेत्र में आई बाढ़ में उनका पूरा परिवार खत्म हो गया था।
मेरे ऊपर पुरानी रंजिश निकाली जा रही हैपुजारी ने आरोप लगाया कि आरोपी पहले से उनके खिलाफ रंजिश रखते थे। यहां से उसका नकोदर में नशे का कनेक्शन है। दावा कि मंदिर के सामने जो धार्मिक स्थल (दरगाह) बनाया गया है, वह पहले धार्मिक स्थल नहीं था बल्कि उनके बैठने की जगह थी। बाद में उसे धर्मस्थल का रूप दे दिया गया।
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