Sonipat Transports  Protest: दिल्ली एनसीआर में ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल, सोनीपत समेत कई जगहों में हजारों ट्रकों के पहिए थमे

Sonipat Transports  Protest: एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गई है। ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध…

Sonipat Transports  Protest: दिल्ली एनसीआर में ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में तीन दिवसीय हड़ताल, सोनीपत समेत कई जगहों में हजारों ट्रकों के पहिए थमे

Sonipat Transports  Protest:

एनसीआर में ट्रांसपोर्टरों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गई है। ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध समेत कई मांगों को लेकर ट्रांसपोर्ट संगठन सड़क पर उतर आए हैं। हड़ताल का असर सोनीपत और आसपास के जिलों में साफ दिखाई देने लगा है। बड़ी संख्या में ट्रक खड़े होने से माल ढुलाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कारोबार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रांसपोर्ट नगरों में सन्नाटा (Sonipat Transports  Protest) पसरा हुआ है। रोजाना आवश्यक सामान, निर्माण सामग्री और औद्योगिक माल ढोने वाले ट्रक अब सड़कों से गायब नजर आ रहे हैं।

21 मई से 23 मई तक सांकेतिक हड़ताल

वहीं सोनीपत स्थित भाईचारा ट्रक एसोसिएशन ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। संगठन के प्रधान अमित कटारिया ने कहा कि सरकार जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि फिलहाल 21 मई से 23 मई तक सांकेतिक हड़ताल की गई है, लेकिन यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आगे बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।

ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर संकट

ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध से हजारों ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना है कि अभी भी बड़ी संख्या में बीएस-4 वाहन सड़कों पर चल रहे हैं और अचानक लगाए गए प्रतिबंध से आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। इसके अलावा ईसीसी शुल्क को भी ट्रांसपोर्टर अतिरिक्त बोझ बता रहे हैं। हड़ताल के चलते कई ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने बुकिंग रोक दी है। माल समय पर न पहुंच पाने से उद्योग और व्यापार जगत की चिंता बढ़ गई है। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की बढ़ती कीमतें, टैक्स और अन्य खर्च पहले ही उन्हें आर्थिक दबाव में ला चुके हैं। ऐसे में नए नियमों ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है।

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