Kaithal Bribery Case: कैथल में रिश्वत मामले में चौकी इंचार्ज को 4 साल की सजा, 50 हजार जुर्माना; एसआई हरपाल सबूतों के अभाव में बरी

Kaithal Bribery Case हरियाण के कैथल जिले में चर्चित रिश्वत मामले में कैथल की अदालत ने पुलिस चौकी भागल में तैनात रहे एएसआई बलविंदर को…

Kaithal Bribery Case: कैथल में रिश्वत मामले में चौकी इंचार्ज को 4 साल की सजा, 50 हजार जुर्माना; एसआई हरपाल सबूतों के अभाव में बरी

Kaithal Bribery Case

हरियाण के कैथल जिले में चर्चित रिश्वत मामले में कैथल की अदालत ने पुलिस चौकी भागल में तैनात रहे एएसआई बलविंदर को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने इसके साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं मामले में आरोपी बनाए गए सब इंस्पेक्टर हरपाल को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण बरी कर दिया गया।

पुलिस कर्मियों द्वारा रिश्वत की मांग

मामला दिसम्बर 2023 का है, जब गांव भागल निवासी संदीप कुमार ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) में शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में आरोप था कि थाने में उसकी माता का नाम हटाने तथा पड़ोसियों अमन और शेखर का नाम केस से निकालने के बदले पुलिस कर्मियों द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायतकर्ता के अनुसार उस समय पुलिस चौकी भागल में तैनात एएसआई बलविंदर और एसआई हरपाल ने उससे 60 हजार रुपये की मांग की थी।

बताया गया कि बाद में बातचीत के दौरान 50 हजार रुपये एएसआई बलविंदर और 10 हजार रुपये एसआई हरपाल को देने की बात तय हुई। शिकायतकर्ता ने रिश्वत मांगने की बातचीत की रिकॉर्डिंग भी विजिलेंस अधिकारियों को सौंप दी और दोनों पुलिस कर्मियों को रंगे हाथ पकड़वाने की इच्छा जताई। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, अंबाला की टीम ने मामले की जांच शुरू की और ट्रैप की कार्रवाई की योजना बनाई। इसके तहत शिकायतकर्ता को 500-500 रुपये के 20 नोट, कुल 10 हजार रुपये देकर ट्रैप के लिए तैयार किया गया। नोटों पर हस्ताक्षर कराए गए और पंच गवाहों की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया पूरी की गई। जांच के दौरान विजिलेंस ने मामले से जुड़े साक्ष्य जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया।

मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. नंदिता कौशिक की अदालत में चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने एएसआई बलविंदर को रिश्वत लेने का दोषी पाया। अदालत ने उसे चार साल की कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ ही 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

वहीं अदालत ने पाया कि एसआई हरपाल के खिलाफ आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इस आधार पर अदालत ने उसे संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले को भ्रष्टाचार के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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