श्री आनंदपुर साहिब : पंजाब के इतिहास को दर्शाने के लिए बनाया गया ‘विरासत-ए-खालसा’ को एक बार फिर से सैलानियों के लिए खोल दिया गया है। दरअसल रखरखाव के चलते इसे बंद रखा गया था। ‘विरासत-ए-खालसा’ महज एक इमारत भर नहीं है, यह उस गौरवमयी इतिहास का साक्षी है, जिसे देखकर आपके चेहरे खुशी से भर जाएंगे। अगर आप भी पंजाब के 500 साल के इतिहास से रूबरू होना चाहते हैं तो आप श्री आनंदपुर साहिब स्थित ‘विरासत-ए-खालसा’ आ जाईए। ‘विरासत-ए-खालसा’ पहुंचकर आप पंजाब के गौरवमयी इतिहास को बारीकी से समझ सकेंगे, वो इतिहास जो हर दिन बुलंद होता जा रहा है।
रखरखाव के लिए साल में दो बार रहता है बंद
आपको बता दें कि पंजाब सरकार ने विश्व प्रसिद्ध ‘विरासत-ए-खालसा’ का निर्माण कराया है। जिसे रखरखाव के लिए साल में दो बार एक-एक सप्ताह के लिए बंद रखा जाता है। गर्मियों में 24 से 31 जुलाई और सर्दियों में 24 से 31 दिसंबर के दौरान रखरखाव के कारण ‘विरासत-ए-खालसा’ सैलानियों के लिए बंद रखा जाता है। इस बार भी 24 से 31 जुलाई तक जरूरी मरम्मत किए गए हैं ताकि यहां आने वाले सैलानियों को किसी तरह की दिक्कत पेश नहीं आए। मंगलवार को ‘विरासत-ए-खालसा’ के खुलते ही सैलानियों का जमावड़ा लग गया। उधर पेड पास को लेकर सैलानियों ने कुछ लोगों ने ऐतराज भी जताया।
‘विरासत-ए-खालसा’ को देख चुके 80 लाख से ज्यादा सैलानी
जानकारी के अनुसार ‘विरासत-ए-खालसा’ को अब तक करीब 80 लाख सैलानी देख चुके हैं। इसके पहले व दूसरे हिस्से में पंजाब के विरसे, गुरू साहिबान के जीवन, श्री गुरू ग्रंथ साहिब जी की स्थापना, बंदा सिंह बहादुर, मिसल काल, महाराजा रणजीत सिंह काल, एंगलो-सिख युद्ध, धर्म युद्ध मोर्चे, पंजाब व देश की आजादी का संघर्ष, भारत-पाक बंटवारा व फिर से बसेरा के सुनहरी इतिहास को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ प्रस्तुत किया गया है। यहां पहुंचने वाले सैलानी महज ढाई घंटे में पंजाब के गौरवमयी इतिहास को बारीकी से समझ सकते हैं।
14 अप्रैल 2006 में हुई ‘विरासत-ए-खालसा’ की शुरूआत
इस महान प्रोजेक्ट की शुरूआत 14 अप्रैल 2006 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने संतों, महापुरूषों की उपस्थिति में किया था। इसके बाद समय-समय पर इसका विस्तार किया जाता रहा। इस बार भी सूबे की कमान कैप्टन सरकार के पास है। जिसका वादा है कि सरकार इस अनमोल विरासत को संभालने के लिए प्रयत्नशील रहेगी। इस इमारत की खासियत ऐसी है कि आप यहां आएंगे तो लौटने का मन नहीं करेगा। क्योंकि यह इतनी शानदार तरीके से बनाई गई है कि आपकी नजर इस पर से हटेगा नहीं। यही कारण है कि लोगों के बीच ‘विरासत-ए-खालसा’ एक पावन स्थल के रूप में जाना जाता है।


